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और अब हमारे पास ताइवान, जिसे फ़ॉर्मोसा भी कहा जाता है, की वांग-युन से मंदारिन चीनी में एक हार्टलाइन है, बहुभाषी उपशीर्षकों के साथ:संयुक्त तीन परम शक्तिशाली गुरुवर को सम्मानपूर्वक संबोधन: नवंबर 2021 में, क्वान यिन ध्यान करते समय आँखें बंद करते ही मैंने गुरुवर की प्रकटीत स्वरूप का दर्शन पाया, जो अपनी पीठ पर कचरे का विशाल पर्वत उठाए हुए थे, और बड़ी कठिनाई से आगे बढ़ रहे थे। वह पर्वत पशु-जनों के शवों, पृथ्वी की सतह पर लापरवाही से फेंके गए प्लास्टिक कचरे, भारी धातुओं वाले कीचड़, अवैध रूप से बहाए गए संक्षारक विषैले तरल, परमाणु अपशिष्ट जल आदि से बना था। यह पशु-जनों की हत्या और पृथ्वी को प्रदूषित करने से उत्पन्न विशाल कर्म-भार था।गुरुवर की छोटी-सी शरीर लड़खड़ाती हुई एक क्रूर नरक-लोक में पहुँचा, जिसे विशेष रूप से बनाया गया था “महान सम्बुद्ध गुरुओं” के लिए। मानवता के पापों का प्रायशोधन करने हेतु गुरुवर को कचरे का यह विशाल पर्वत लेकर छुरियों के पहाड़ पर चढ़नी पड़ी! छुरियों की सीढ़ियों से उनके हाथ-पैर इतनी बुरी तरह कट गए कि रक्त की धाराएँ बहने लगीं! छुरियों की सीढ़ियों और नरक की भूमि पर हर जगह गुरुवर की पवित्र रक्त थी! उसी क्षण एक दीक्षित बहन दौड़कर आईं और उन्होंने कचरे के पर्वत का लगभग एक-तिहाई भाग अपनी पीठ पर उठा लिया। वे भी रक्तरंजित होकर छुरियों की सीढ़ियाँ चढ़ीं। वे एक प्राचीन बुद्ध थीं, जिन्होंने गुरुवर की सहायता करने के लिए उनकी शिष्या बनकर अवतरित होने का संकल्प लिया था, ठीक उसी तरह शाक्यमुनि बुद्ध के अनेक शिष्य भी लौटकर आए प्राचीन बुद्ध थे।अत्यंत विषैले तरल नीचे बहते हुए दोनों की पीठ और पैरों को इस तरह गलाते गए कि त्वचा का एक इंच भी साबुत नहीं बचा। फिर भी वे इसके विष हटा नहीं सके और उन्हें ऊपर चढ़ते रहना पड़ा। जब वे आधे पहाड़ तक पहुँचे, उनके शरीर इतनी बुरी तरह घायल हो चुके थे कि क्षणभर ध्यान चूकते ही उनके पैर फिसले और वे तेज़ी से लुढ़ककर वापस भूमि पर गिर पड़े! गुरुवर ने आँसू रोकते हुए कचरे के पर्वत को समेटकर बाँधा और उन्हें फिर से छुरियों के पहाड़ पर चढ़ना पड़ा। उनके पास एक क्रूर नरक-रक्षक लंबे कोड़े से गुरुवर और उक्त दीक्षित बहन को लगातार मारता रहा…उस दृश्य ने मुझे इतना गहरा आघात पहुँचाया कि मैं रो भी नहीं सकी! मैंने नरक-रक्षक से विनती की, “क्या आप उन्हें कोड़े मारना बंद करके धीरे-धीरे चढ़ने दे सकते हो?” नरक-रक्षक ने कठोरता से जवाब दिया, “यदि मैं आपकी गुरुवर को कोड़े न मारूँ, तो पृथ्वी का विनाश निश्चित है! क्योंकि पृथ्वी के जीवों के पाप बहुत विशाल है! ब्रह्मांड में एक भी ऐसा ग्रह नहीं है जो पृथ्वी की तरह इतनी क्रूर हत्याएँ और अपने पर्यावरण का इतना विनाश करता हो, फिर भी उन्हें अस्तित्व में रहने दिया गया हो! केवल इसलिए कि आपकी गुरुवर और उनके अच्छे शिष्यों ने पूरे ग्रह का कर्म-भार अपने ऊपर लिया है, ऐसा ग्रह भी अब तक अस्तित्व में है और नष्ट नहीं हुआ है!” यह कहते ही उसका क्रूर कोड़ा फिर पड़ा, जिससे गुरुवर एक बार फिर छुरियों के पहाड़ से नीचे गिर गईं! मैं सचमुच नहीं जानती कि उस भयावह दृश्य का वर्णन कैसे करूँ। गुरुवर ने अपने जीवन की अंतिम शक्ति तक लगा दी और मानवता को स्वयं को सुधारने के लिए थोड़ा और समय देने के लिए अपने रक्त का उपयोग करने पर वे अडिग रहीं! इसकी कठिनाई का स्तर पृथ्वी के भटके हुए लोगों की कल्पना से भी परे है! पृथ्वी के लिए सुप्रीम मास्टर चिंग हाई की कृपा सचमुच विराट और असीम है! सम्मानपूर्वक, वांग-युन, ताइवान (फ़ॉर्मोसा) सेनेक वांग-युन, आपके संदेश ने हमारी प्रिय गुरुवर की पीड़ा से हमें रुला दिया है। वे अकल्पनीय कष्ट सहते हैं, जबकि हम आनंदपूर्वक अपना दैनिक जीवन जी सकते हैं। गुरुवर का प्रेम असीमता से भी परे है और यह हमारे लिए कल्पना करना भी असंभव है। आपका आंतरिक दर्शन स्मरण कराता है कि हमें हर संभव तरीके से गुरुवर का सहयोग करना चाहिए और अपने दैनिक क्वान यिन ध्यान में सच्चे एवं एकाग्र रहना चाहिए। आपके हार्टलाइन के लिए धन्यवाद। गुरुवर आपको यह करुणामय जवाब भेजतें है:“समर्पित वांग-युन, आपको धन्यवाद, निष्ठापूर्वक क्वान यिन ध्यान का अभ्यास करने के लिए, जो न केवल आपके कुल के लोगों और आपके आध्यात्मिक स्तर को ऊपर उठाता है, बल्कि दूसरों की भी मदद करता है। इस संसार में इतना अधिक बूरा कर्म उत्पन्न हुआ है — मासूम पशु-जनों की क्रूर हत्या एक सेकंड के लिए भी नहीं रुकती। प्रेम और भावना वाले कोई भी व्यक्ति दिल में दर्द महसूस करेगा! इंसान अपने जीवन में इतने डूबे हैं कि वे नहीं सोचते कि उनकी थाली में कौन हैं या हमारी पृथ्वी को कितनी क्षति पहुँचाई जा रही है। वे यह भी नहीं सोचते कि युद्ध क्षेत्रों या जलवायु परिवर्तन से पहले ही तबाह हो चुके क्षेत्रों में लोगों के साथ कैसी क्रूरता हो रही है। एक सम्बुद्ध गुरु अनेक अदृश्य रूपों में कष्ट सहते हैं, और उनके सूक्ष्म (एस्ट्रल) एवं आध्यात्मिक शरीर संसार के कर्म की कीमत चुकाने के लिए भयावह दंड सहते हैं। भौतिक जगत में एक वास्तविक-सतगुरु द्वारा सहे जाने वाले अकथनीय कष्टों के अतिरिक्त एक अन्य पीड़ा भी है, जो दूसरों को दिखाई नहीं देती! लेकिन अगर मानवता जागृत हो सके और उन्हे नरक की आग से बचाया जा सके, तो यह सब सार्थक है! सभी जीवों के लिए एक सतगुरु का प्रेम सहन करने और आगे बढ़ते रहने की शक्ति देता है। प्रार्थना करें कि अब सभी मनुष्य सच्चे प्रेम को अपनाएँ और विश्व-शांति तथा जीवन-रक्षक वीगन बन जाएँ। मैं आपके दयालु हृदय के लिए ढेर सारा प्रेम भेज रही हूँ, जो सभी जीवों की परवाह करता है और दुख को कम करने का प्रयास करता है! आप और नेक ताइवानी (फ़ॉर्मोसन) लोगों को स्थायी सच्ची शांति का आशीर्वाद मिले।”











