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प्रतिलिपि
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एक आत्मिक यात्रा: कला के माध्यम से आध्यात्मिक साधना की प्रेरणा, बहु-भागीय शृंखला का भाग 9

विवरण
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सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के जीवंत चित्रों “मैंगोस्टीन,” “शिहू का सूर्यास्त” और “एकांत साधना” के माध्यम से स्वर्ग की कला दीर्घा देखें। ये कलाकृतियाँ शिहू आश्रम में एक शांतिपूर्ण काल के दौरान बनाई गई थीं और शांति, सादगी तथा प्रकृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाती हैं।

महान चित्रकृतियाँ पूरे विश्व में बहुमूल्य मानी जाती हैं। हर तूलिका-स्पर्श इतिहास, संस्कृति, भावनाओं और यहाँ तक कि आशीषों को भी दर्शा सकता है, जिससे अतीत, वर्तमान और भविष्य की हमारी समझ समृद्ध होती है। विश्वविख्यात आध्यात्मिक गुरु और कलाकार के रूप में, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) न केवल अपनी आध्यात्मिक शिक्षाओं, बल्कि अपनी असाधारण कलाकृतियों से भी मानवता का उत्थान करती हैं।

आज हम स्वर्ग की कला दीर्घा की यात्रा करेंगे, जिसमें सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) की कलाकृतियाँ प्रदर्शित हैं। उनके चित्र स्वर्ग के वैभव को सुंदरता से दर्शाते हैं, हमारे संसार में आशीषें लाते हैं और उच्चतर लोकों की झलक दिखाते हैं। उनकी कला हमें प्रत्येक जीव के भीतर विद्यमान दिव्य सौंदर्य और आध्यात्मिकता के साथ-साथ अपने स्वर्गीय धाम की भव्यता का भी स्मरण कराती है।

सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने चित्रकला का कोई व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं लिया है। फिर भी, उनकी कलात्मक प्रतिभा ब्रह्मांड के असीम ज्ञान से प्रवाहित होती है। जैसा कि मास्टर ने समझाया है, उनकी कलाकृतियाँ उच्चतर लोकों की अभिव्यक्तियाँ हैं, जो दर्शकों को दिव्य सौंदर्य और आध्यात्मिक प्रेरणा की झलक देती हैं।

Master: और शायद मेरे चित्र के पास से क्षणभर गुज़रते समय दर्शक अपने भीतर की आध्यात्मिक चिंगारी को याद कर ले। यह केवल वह आभामंडल है, जो चित्र या मेरी कलाकृति में समाया है। पर हमें याद रखना चाहिए कि ऐसी दिव्य कला भी स्वर्गीय धाम की वास्तविक दिव्य रचना की केवल एक प्रतिलिपि है।

F1: ये कलाकृतियाँ कलाकार के व्यक्तित्व को चित्रित करने के सामान्यतः स्वीकृत मूल्यों से कहीं परे हैं। उनके चित्रों की रचनात्मकता हमारी आत्मा के निर्मल सौंदर्य को जागृत करती है और हमारे हृदय पर शांतिपूर्ण जीवनशैली, यानी वीगन जीवन का संदेश अंकित करती है।

F2: […] पिछले वर्ष महामारी शुरू होने के बाद से, मास्टर विभिन्न लोकों के बोधिसत्त्वों (संतों) से इस संसार में आकर मानवजाति को आशीष देने और वीगन बनने के लिए जागृत करने का सच्चे मन से अनुरोध कर रही हैं। मैंने विशिष्ट अतिथियों को अपने घर भोजन पर बुलाया और मास्टर से भोजन को आशीष देने तथा उन्हें मांस खाना छोड़ने का साहस प्रदान करने की प्रार्थना की। मास्टर की महान शक्ति से उनमें से तीन वीगन बन गए और दो ने 65 वर्ष की आयु से पहले दीक्षा ले ली। वे मास्टर के अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने मास्टर के चित्रों की प्रतिकृतियों को प्रकाश से दमकते देखा और सुप्रीम मास्टर टेलीविज़न चलते समय अपने बैठक-कक्षों को भी प्रकाश से भरा पाया। दीक्षा के बाद उन्हें यह अनुभव भी हुआ कि उनके संबंधी सचमुच उच्चतर लोकों में चले गए हैं। वे अत्यधिक प्रसन्न होकर रो पड़े। […]

आज आइए, स्वर्गीय सौंदर्य के माध्यम से आध्यात्मिक यात्रा पर चलें और मास्टर के संन्यासी जीवन की पवित्रता व सुरुचि को अनुभव करें। हम प्रायः संन्यासी जीवन को के पाठ मुख्यतः ध्यान, धर्मग्रंथों और आध्यात्मिक साधना पर केंद्रित मानते हैं। लेकिन मास्टर के चित्रों में हम शांति, सुरुचि और काव्यात्मक सौंदर्य से भरे दैनिक जीवन को भी देख सकते हैं।

सितंबर से दिसंबर 1990के बीच, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने “Mangosteen,” “Hsihu Sunset” और “Retreat” सहित अनेक चित्र बनाए। ये कलाकृतियाँ सिहू आश्रम में उनके जीवन के एक शांत और अपेक्षाकृत सहज दौर की झलक देती हैं।

आइए “Mangosteen” से आरंभ करें, जो सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) द्वारा सिहू आश्रम में बनाया गया एक स्थिर-वस्तु तैलचित्र है। इस चित्र के पीछे की कहानी उस विशेष काल के दौरान मास्टर के कलात्मक जीवन की स्नेहपूर्ण झलक देती है।

एक शाम सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) सामूहिक ध्यान में सम्मिलित होने के लिए प्रसन्नतापूर्वक पहाड़ी से नीचे आईं। लेकिन इस सभा का विशेष विषय वह स्थिर-वस्तु तैलचित्र था, जिसे उन्होंने अभी-अभी पूरा किया था। तुलना के लिए मास्टर ने चित्र के पास एक मैंगोस्टीन भी रखा। चित्र के ताज़गी भरे, सजीव और चमकीले रंग सहज एवं घरेलू आत्मीयता का अनुभव कराते हैं। ध्यान से देखने पर चित्रित मैंगोस्टीन असली फलों से भी अधिक सजीव और वास्तविक प्रतीत होते हैं।

कलाकार का रंग-प्रयोग और चित्र-संयोजन, दोनों ही उत्कृष्ट हैं। लाल रंग ऊर्जा से भरपूर है, जबकि पूरी कलाकृति सहजता और आत्मीयता का भाव जगाती है।

ध्यान से देखने पर चित्र-संयोजन में अनेक मनमोहक बारीकियाँ दिखाई देती हैं। कटा हुआ मैंगोस्टीन गहरे बैंगनी-भूरे छिलके और चमकीले सफ़ेद गूदे को दर्शाता है, जबकि एक अन्य खुला फल गहरे बैंगनी-लाल रंग प्रकट करता है। दो बंद मैंगोस्टीन धूसर-हरी मेज़ पर शांत भाव से रखे हैं और चारों ओर कमरे के गर्म रंग हैं। छोटी खिड़की के बाहर हरी-भरी वनस्पति और धूप में नहाया तंबू ध्यान व शांत चिंतन के लिए मनोरम परिवेश का संकेत देते हैं।

“Mangosteen” केवल फल का रूप चित्रित नहीं करता, बल्कि एक साधारण क्षण के सौंदर्य और शांति को साकार करता है। अपने अभिव्यंजक रंगों, सरल संयोजन और सहज वातावरण से यह चित्र आंतरिक शांति तथा दैनिक जीवन के शांत सौंदर्य के प्रति सराहना जगाता है।

आइए “एकांत साधना” के साथ मास्टर के कला-जगत की यात्रा जारी रखें, जिसे सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने सिहू आश्रम में अपने प्रवास के दौरान बनाया था। घने जंगल में, हरी-भरी वनस्पति के बीच गहरे हरे रंग का एक तंबू शांत भाव से खड़ा है, जहाँ एक हल्की-सी पगडंडी से पहुँचा जा सकता है।

प्राकृतिक परिवेश में लगभग पूरी तरह घुला-मिला यह तंबू ध्यान और चिंतन के लिए शांत व सुरक्षित स्थान प्रदान करता है। यह दृश्य गहन निस्तब्धता का अनुभव कराता है, मानो पूरा वन एकांत साधना की शांत भावना में सहभागी हो।

सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) ने यह चित्र फ़ॉर्मोसा के मियाओली स्थित सिहू आश्रम में एक ध्यान-साधना शिविर के दौरान बनाया था। चित्र में पेड़ बहुत घने उगे हैं। पहली नज़र में रंग सरल लग सकते हैं, पर मास्टर ने इन छटाओं को बनाने के लिए वास्तव में दस अलग-अलग रंग मिलाए थे। मास्टर ने कहा, “यह चित्र देखने के बाद क्या किसी का एकांत साधना पर जाने का मन करता है? जंगल कितना सुंदर है! कितना उजला और रंग-बिरंगा है।” यह चित्र एकांत साधना के शांत वातावरण के साथ-साथ पेड़-पौधों की भरपूर जीवंतता को भी व्यक्त करता है। यह अन्य जीवों की उपस्थिति के प्रति कलाकार की गहरी संवेदनशीलता और समस्त सृष्टि से आंतरिक एकत्व के भाव से उपजे असीम आनंद को दर्शाता है।

पीले, पीले-हरे, घास जैसे हरे, नीले-हरे, गहरे हरे, पीले-भूरे और हरे-भूरे रंगों का सामंजस्यपूर्ण मिश्रण वन-परिवेश की समृद्धि को सूक्ष्मता से व्यक्त करता है। इस जीवंत प्राकृतिक परिवेश में एकांत तंबू सादगी, शांति और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक बन जाता है।

यह चित्र याद दिलाता है कि किसी स्थान को वास्तव में बहुमूल्य वैभव नहीं, बल्कि भीतर की ओर मुड़ने, शांतिपूर्वक ध्यान करने और आध्यात्मिक साधना को गहन बनाने की सुविधा बनाती है। प्रकृति से घिरा हुआ अत्यंत साधारण साधना-स्थल भी आंतरिक जागृति का पवित्र आश्रय बन सकता है।

“Retreat” के शांत आश्रय से अब दृष्टि “Hsihu Sunset” के दीप्तिमान सौंदर्य की ओर करें, जो पर्वतों में साँझ के क्षणभंगुर वैभव को साकार करता है।

एक शाम सूर्यास्त के समय सुप्रीम मास्टर चिंग हाई को अचानक प्रबल प्रेरणा मिली और उन्होंने पौधशाला के सामने वाली बालकनी में चित्रफलक लगा दिया। डूबते सूर्य के सामने मास्टर ने सहज भाव से तूलिका के कुछ मुक्त स्पर्श किए और शीघ्र ही लहराते पर्वत व साँझ के दमकते रंग कैनवास पर जीवंत हो उठे। पाँच मिनट से भी कम समय में रात हो चुकी थी। मास्टर ने उस समय चित्र अधूरा छोड़कर तूलिका रख दी। प्रसन्न होकर उन्होंने वहाँ रहने वाले शिष्यों और सह-दीक्षितों को चित्र में सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए बुलाया। आश्चर्य और प्रशंसा से भरे सभी लोग सामने के सुंदर दृश्य का वर्णन करने के लिए कुछ पल निःशब्द रह गए। बाद में पिंगतुंग के एक ध्यान-साधना शिविर में जाकर मास्टर ने अंततः चित्र पूरा किया।

“Hsihu Sunset” सिहू के आसपास के पर्वतीय भू-दृश्य का विशिष्ट विहंगम दृश्य प्रस्तुत करता है। एक सीधी पहाड़ी सड़क हरी चोटियों के बीच से गुज़रती है और काटी गई ढलानों पर खुली चट्टानों के निशान दिखाई देते हैं। पर्वत, चट्टानें और पेड़ हरे रंग की कोमल परतों में चित्रित हैं, जबकि हल्की धूसर सड़क शांत भाव से दृष्टि को पूरे भू-दृश्य में आगे ले जाती है।

फिर भी चित्र का वास्तविक केंद्र दीप्तिमान संध्या-आकाश है। लहराते पर्वतों के ऊपर नारंगी, लाल, गुलाबी और सुनहरे बादल दमक रहे हैं, जबकि क्षितिज के पास हल्के नीले रंग की पट्टी ठहरी हुई है। धूसर बादल निकट आती रात का संकेत देते हैं, फिर भी सूर्यास्त के चमकीले रंग दृश्य को स्नेह और विस्मय से भरते रहते हैं।

मास्टर ने बताया है कि कभी-कभी बादलों और आकाश में दिव्य कृपा कैसे प्रकट होती है। “सीहु सनसेट” में पर्वतों के ऊपर चमकते रंग हमें सृष्टि के सौंदर्य के सामने ठहरने और स्वर्ग से शांत जुड़ाव अनुभव करने का आमंत्रण देते हैं।
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