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प्रतिलिपि
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सुप्रीम मास्टर चिंग हाई (वीगन) के साथ मीडिया साक्षात्कार, 12 भागों का भाग 5

विवरण
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इस एपिसोड में, मास्टर कविताएँ और गीत प्रस्तुत करती हैं और उन गीतों के बोल समझाती हैं जो ईश्वर के लिए आत्मा की गहरी तड़प व्यक्त करती हैं।

(हम समाचारपत्र चलाते हैं; हम ही जो इसे छापते हैं।) आप साहसी हैं, है ना? (यदि हम यह नहीं कर पाए, तो इसे बंद कर देंगे।) साहसी हैं, सचमुच में? (हमने इसे स्वयं शुरू किया, और स्वयं ही छापते हैं।) ओह, सही। इसी कारण यह कठिन हो जाता है। (ऐसा नहीं है कि वे पैसा लगा रहे हैं।) (ऐसा भी नहीं कि वे हमें कुछ दे रहे हैं।) ओह, सच में? लेकिन विज्ञापन फीस का क्या? क्या वे विज्ञापन छापने के लिए आपको भुगतान नहीं करते? (यदि वे विज्ञापन देते हैं, तो उन्हें हमें भुगतान करना पड़ता है।) अच्छा, ऐसा है? (लेकिन यदि वे अब विज्ञापन न दें, तो हम…गुरुजी वह कहावत जानती हैं, “उस व्यक्ति के बिना भी बाज़ार में भीड़ रहती है।”) ओह, सच में? (एक व्यक्ति जाता है, दूसरा आ जाता है।) (जी, इसलिए हम अपना काम करते रहते हैं।) (डरने की कोई बात नहीं है।) हमें नहीं पता अगर वे हमारे साथ है या दुश्मन के साथ हैं, है ना? ठीक है। (कौन जाने? शायद किसी दिन गुरुजी का कोई शिष्य आकर कहे, “मैं विज्ञापन देना चाहता हूँ।) पत्रकार होने के लिए साहस चाहिए। यह बहुत अच्छा है।

पत्रकारिता में काम करने के लिए साहस चाहिए। यह हमारे पेशे और हमारे आदर्शों के लिए सत्य है। यह आसान नहीं है। बहुत अच्छा, मुझे यह पसंद आया। तो, इसलिए कि उन्होंने ऐसा कहा, क्या हमें छोड़ देना चहाइए?) (हम इसे वापस नहीं ले सकते।) (“ठीक है, भूल जाइए, इसे जाने दीजिए। मैं इसे प्रकाशित नहीं करूँगा।”) हाँ। यह आपके साहस की परीक्षा भी है, है न? शायद बाद में वह लिखकर विनती करे, “अरे,उस दिन मैं केवल मज़ाक कर रही थी। नाराज़ मत होइए। आज मैं तीन-चार और विज्ञापन दूँगी।” हमें हर कीमत पर वही करना चाहिए, जिसे हम सही मानते हैं। (एक बार करने का निश्चय कर लें, तो उसे पूरा करते हैं।) हाँ।

(आपके कुछ शिष्यों ने भी विज्ञापन रखें हैं, लेकिन उन्होंने यह नहीं कहा कि वे आपके शिष्य थे।) ऐसा है? (वे कुछ नहीं कहते।) ठीक है।(उन्होंने इसका जिक्र नहीं किया।) उन्होंने नहीं कहा कि वे आपके शिष्य थे? (एक व्यक्ति है...) वे सब पर्दे के पीछे चुपचाप काम करते हैं। (वे फर्नीचर बेचते हैं।) (ठीक है। वे फर्नीचर बेचते हैं।) (मुझे नहीं पता उसे अभी तक पता है। (मोंटेरे पार्क और अलहंबरा में मास्टर के बहुत-से शिष्य हैं।) कुछ फर्नीचर स्टोर के मालिकों ने हमसे उनके लिए विज्ञापन लगाने को कहा।) (उनसे पूछा गया, "आपने पहले हमारी पत्रिका में विज्ञापन क्यों नहीं दिया...?) (जब मैंने [मास्टर] की तस्वीर देखी, तो मैंने विज्ञापन देने का फैसला किया।") सच में? बहुत सुंदर है, है ना? फिर मैंने उसे देखा कि वह कितनी सुंदर थी और कहा, “अरे! मेरे पास इतनी सुंदर तस्वीर है और मुझे पता तक नहीं था?” मुझे नहीं पता था कि मेरे पास वह तस्वीर है। यह सब क्या है? ठीक है। कृपया इसे ले लीजिए, धन्यवाद। आप भैंसे(-व्यक्ति) जैसे दिखते हैं। पानी के भैंसे(-व्यक्ति) जैसे। जैसे पानी भैंस (-व्यक्ति) जो बहुत सा पानी पी रहा हो, क्या आपके कोई और प्रश्न हैं? या कोई निजी बात है आप पूछना चहते हो, तो बेझिझक पूछिए। यह ठीक है। वह वहाँ बात कर सकते हैं।वह ठीक है। हम दोनों यहाँ बात कर सकते हैं। (नहीं, हम तो बस आनंद के लिए बातें कर रहे हैं।) आनंद ले रहे हैं? ठीक है। (परिवार की तरह।) हाँ। ठीक है।

अगर थोड़ा खाली समय हो, हम मजे के लिए साथ मिलकर कविता-पाठ कर सकते हैं। कविता-पाठ, कॉफ़ी पीना, और ऐसी ही कुछ चीज़ें।(कराओके भी।) मास्टर, आप बहुत अच्छा गाती हैं। अवश्य। ठीक है। मैंने अभी कुछ शानदार ट्विस्ट गीत निकाले हैं। (वापसी में, गुरुवर चलते हुए गा रहे थे, “मैं नौका से पार जाती हूँ।”) (यह कितना मज़ेदार है, यह देखने के लिए हमें वीडियो देखना ही होगा।)

(मास्टर ने हाल में कुछ अमेरिकन और ओलासिस (वियतनामी) गानों के नए बोल लिखे हैं।) (मासटर्म क्या हम इस बार आपकी कविता का एक अंश प्रकाशित कर सकते हैं?) कौन सी कविता? (जो कविता आपके उस नई मैगज़ीन में प्रकाशित की थी... वह कविता बहुत अच्छी थी।) ठीक है। हाँ, अगर आप चाहें। (अंग्रेजी कविता। यह बहुत रोमांटिक है!) लेकिन यह पूर्णतः ईश्वर के लिए प्रेम के बारे में है। लेकिन कोई इसे समझता है, मैं नहीं जानती। (लेकिन हम उसे बस इसी तरह पढ़ते हैं।) वैसे लोग उस “प्रेम” का अर्थ प्रे मानवीय म भी समझ सकते हैं।(जी हाँ।) वह कविता, “मेरा प्रेम बहुत दूर है।” (हाँ। वह अच्छी है।) उसी कविता को एक सुंदर गीत में बदल दिया है। मैं उसकी धुन बनाऊँगी।

मेरा प्रेम बहुत दूर है, क्या उन्हें अब भी याद है कि मैं कौन हूँ? आकाशगंगा हमें अलग करती है, मेरी तड़प की नदी सी गहरी, और पर्वत सी ऊँची मेरा प्रेम बहुत दूर है, जहाँ स्वर्ग और पृथ्वी मिलते हैं, जहाँ स्वर्ग और पृथ्वी मिलते हैं (हाँ।) वह परमेश्वर का द्वीप है। अनादि वक्त से, हे तड़प, छोड़ दो अकेला मुझे! बार-बार, भटकती हूँ मैं, हज़ारों आकाशगंगाओं और लोकों में, असंख्य जन्म और मरणों से गुज़रकर, अपने प्रियतम को खोजती हुई; प्रेम मेरा सदा दूर है, हृदय मेरा तड़पता है सदा तुम्हारे लिए...

क्या यह अच्छी है? (हाँ। गुरुवर बहुत अच्छा गाते हैं।) क्या इसका मुखड़ा भी है? या बस इतना ही? समझी। (जी हाँ।) (आज दोपहर, मैंने उस अंश को दूसरी बार फिर पढ़ा।) (आज दोपहर मैंने उसे दूसरी बार फिर पढ़ा।) बीच के अंश का क्या? बीच का अंश। वह कैसे है? (बार-बार, मैं भटकती हूँ) नहीं, वह अलग है।

मेरा प्रेम बहुत दूर है, क्या उन्हें अब भी याद है कि मैं कौन हूँ? लंबी रातों, तड़पती हूँ अपने परम मित्र के लिए, देखती हूँ सपने आकाशगंगा के ओह! सुनिए, सुनिए, राहगीर कोई राहगीर कोई कृपया रुककर मुझे बताएँ कि उनका साम्राज्य कहाँ है; क्या जानते हैं आप मार्ग? मेरा प्रेम बहुत दूर है, जहाँ स्वर्ग और पृथ्वी मिलते हैं, अनादि वक्त से

“अनादि वक्त” का अर्थ है जिसका कोई आरंभ न हो—सामान्यतः इसका अर्थ समयातीत होता है। लेकिन इसका अर्थ कोई व्यक्ति जो बेवफ़ा हो सकता है। परमेश्वर हमें पीछे छोड़ गए हैं; लगता है, वे हमारी ओर कोई ध्यान नहीं देते। यह नहीं है ऐसा? अनादि समय से, हे तड़प, छोड़ दो अकेला मुझे! बार-बार, भटकती हूँ मैं, हज़ारों आकाशगंगाओं और लोकों में, असंख्य जन्म और मरणों से गुज़रकर, अपने प्रियतम को खोजती हुई; प्रेम मेरा सदा दूर है, हृदय मेरा तड़पता है सदा तुम्हारे लिए...

हम सच में खोज रहे हैं— अपने आत्म-स्वरूप को खोज रहे हैं। अपने परम प्रिय को खोज रहे हैं। वह हमारा सच्चा स्वरूप है। अपने मूल स्व को खोज रहे हैं। वही सबसे महान प्रियतम है। इस संसार में छोटे प्रेम बस नकल हैं, नकल हैं। इसलिए, मनुष्य उस महान प्रेम के कारण ही निरंतर प्रेम की खोज करता रहता है, समझे? लोगों को एक-दूसरे से प्रेम करना होगा, और एक-दूसरे को खोजना होता है। यह सब उसी महान प्रेम के कारण है। (इसमें बहुत आनंद है।) (आप खुश बुद्ध हैं! आप इतनी प्रसन्न और कलात्मक भी हैं।) (लेकिन आज, आपके हाथों को देखकर, मैं देख सकता हूँ आप कलाकार क्यों हैं। ऐसे कोमल अंगुलियों के साथ, आपके सिवाय कौन पेंट सकता था?)

(क्या गुरुवर हर वर्ष कला प्रदर्शनी लगाते हैं?) वास्तव में नहीं। केवल कभी-कभार। मैं तभी प्रदर्शनी लगाती हूँ, जब लोग मुझे यह करनेआमंत्रित करते हैं। (प्रदर्शनी ताइवान (फ़ॉर्मोसा) में थी या...?) सामान्यतया, मेरे शिष्य इसे देखने आते हैं, और दूसरे लोग आगन्तुक की तरह आते हैं। लेकिन पिछले वर्ष, बेल्जियम के ब्रसेल्स में एक प्रदर्शनी हुई थी। इसे बेल्जियम कहते हैं, सही है? (ब्रसेल्स।) ब्रसेल्स, बेल्जियम। ठीक है। ठीक है। क्योंकि उन्होंने मुझे प्रदर्शनी के लिए मेरी पेंटिंग लाने के लिए आमंत्रित किया। इसीलिए मैंने औपचारिक प्रदर्शनियाँ लगाई हैं। लेकिन आमतौर पर, मैं जहाँ भी जाती हूँ—चाहे व्याख्यान देने या किसी और काम से— मेरे शिष्यों कुछ चित्र साथ लाकर दीवार पर टाँग देते हैं, ताकि अतिथियों उन्हें देख सकें। (सुंदर। वे सारी पेंटिंग बहुत सुंदर हैं।) किसी औपचारिक प्रदर्शनी की आवश्यकता नहीं है।

(उस दिन हमने दो चित्र चुने थे, है ना?) कौन-से चित्र? (हम उन्हें अपने साथ घर ले जाना चाहते थे।) (“द सन।”) (“द सन” वाला।) (हम केवल उसकी तस्वीरें ले सकते थे; उसे घर नहीं ले जा सकते थे।) (हाँ, हमने तस्वीरें ली थीं।) आप उन्हें घर ले जाना चाहते हैं? मैं आपको दे देती हूँ। कौन-से दो—कौन-कौन से? मैं आपको दे दूँगी। (हमें वापस जाकर तस्वीरें फिर से देखने दीजिए; तब हमें याद आ जाएगा कि वे कौन-से थे।) ठीक है, “द सन।” (वे काफ़ी सख़्त थे, है ना?) (बहुत सख़्त। हम पास पहुँचते, उससे पहले ही वे हमें पीछे धकेलने लगे। उन्होंने हमें चित्र देखने तक नहीं दिए।) क्योंकि जहाँ तक शिष्यों की बात है... (केवल एक-दो चित्रों पर गुरुवर के हस्ताक्षर हैं।) क्योंकि उन्हें डर रहता है कि शिष्य पेंटिंग को गंदा कर सकते हैं।

(कुछ चित्रों पर गुरुवर ने हस्ताक्षर क्यों नहीं किए?) शायद फ़्रेम के कारण... (मैंने वहाँ केवल “बिएन डोंग” लिखा देखा; नीचे केवल नाम था, और ऊपर हस्ताक्षर थे।) शायद चित्रों को फ़्रेम करते समय हस्ताक्षर ढक गए होंगे। कभी-कभी मैं हस्ताक्षर करना भूल जाती हूँ। जब शिष्यों उन्हें मेरे पास लाते हैं, मुझे याद है और मैं हस्ताक्षर कर देती हूँ। क्योंकि एक बार मैं मजे के लिए पेंटिंग करती हूँ और उसके बाद ही मैं ऐसी चीजों के बारे में सोचती हूँ। उन्हें मुझे याद दिलाना पड़ता है, तब मुझे हस्ताक्षर करने की याद आती है। (वे बहुत सुंदर हैं। मुझे चित्र देखना सचमुच बहुत अच्छा लगता है।) बस मुझे बतायें आप कौन-से दो चित्र घर ले जाना चाहते हैं।(हाँ।) मैं उन्हें आपको दूँगी। ख़ुद को चोर बनने के झंझट से बचायें! मुझे साफ़-साफ़ बताइए— शीर्षक क्या है? (वह वाला “द ग्रीड” है।) तो मैं उसे आपके पास भिजवा दूँगी, ठीक है? (हाँ।) या मैं (...)से कह सकती हूँ कि वह उसे आपके पास ले आए, ठीक है? (हाँ।)

ठीक है। अगर आपको कला से प्रेम है, तो मुझे बहुत गर्व और प्रसन्नता है। (गुरुवर, क्या आपके कोई और भी गीत हैं? कृपया हमारे लिए एक और गीत गाइए।) (बहुत बढ़िया! पिछला गीत बहुत सुंदर था!) कोई औलासी (वियतनामी) गीत? (हाँ, कोई औलासी(वियतनामी) गीत।) मेरे पास औलासी (वियतनामी) गीत भी अधिक नहीं हैं। (लेकिन क्या उस गीत का मूल रूप अंग्रेज़ी में नहीं था, मास्टर?) हाँ, यह सही है। (फिर उसका अनुवाद ओलासिस (वियतनामी) में हुआ।) फिर उसका चीनी और औलासी (वियतनामी) में अनुवाद हुआ।(हाँ।) (फिर उसका अनुवाद ओलासिस (वियतनामी) में हुआ।) (तीनों भाषाओं में।) कभी-कभी मैं औलासी (वियतनामी) में लिखती हूँ, फिर उसका अंग्रेज़ी और चीनी में अनुवाद करती हूँ। (फिर उसका अनुवाद ओलासिस (वियतनामी) में हुआ।) इस बार, मैंने उसे पहले अंग्रेज़ी में लिखा, फिर औलासी (वियतनामी) और चीनी में अनुवाद किया। अंग्रेज़ी संस्करण की धुन अलग है।(हाँ।) (फिर उसका अनुवाद ओलासिस (वियतनामी) में हुआ।) वह इस धुन जितनी जीवंत नहीं है। उसकी लय कुछ बोलेरो जैसी है, है ना? चा-चा-चा। (कौन-सी धुन? किस गीत की?) अभी वाले गीत की! मेरा प्रेम बहुत दूर है, क्या याद है उन्हें अब भी कि मैं कौन हूँ? (पासो दोबले।) हाँ। (हाँ।)

कुछ और भी हैं—दो या तीन गीत और। दो-तीन और औलासी (वियतनामी) गीत। लेकिन अभी उनका अभ्यास नहीं किया है। कोई अभ्यास नहीं किया था। मैंने उन्हें अभी-अभी लिखा है, इसलिए इस भाई से उनकी स्वर-लिपि लिखने में सहायता माँग सकती हूँ।(हाँ।) क्योंकि मैं उन्हें पहले ही गा चुकी हूँ। (हाँ।) इसलिए मैंने उनसे उन्हें लिखने को कहा। (धुन लिखने को।) स्वर-लिपि लिखने को। और कौन-सा गीत है? और कौन-सा गीत? कोई औलासी (वियतनामी) गीत। (“रीमेम्बर मी व्हेन द रैन फॉल्स” और “द सुप्रीम मास्टर,” है ना?)

(साथ-साथ, साथ मिलकर हमने वर्षा देखी है।) आह! गीत “रीमेम्बर मी व्हेन द रैन फॉल्स।” साथ-साथ... वह गीत गाना कठिन है, है ना? (थोड़ा ऊँचा है।) साथ-साथ, साथ मिलकर हमने वर्षा देखी है। यह कौन-सी ले है? (रुम्बा।) आह, रुम्बा। (लेकिन थोड़ा तेज।) आगे क्या है? मैं भूल गई।

इंद्रधनुष देखा है हमने। याद करो, याद करो, साथ बिताए वे समय। याद करो, याद करो, साथ बिताए वे समय।

मुझे वर्षा पसंद है। क्योंकि वर्षा स्वर्ग से भेजे गए संदेश जैसी होती है। जब वर्षा होती है, तो वह स्वर्ग और पृथ्वी को जोड़ने वाले पुल जैसी भी लगती है। इसलिए मुझे वर्षा बहुत पसंद है। मैं अक्सर अपने शिष्यों के साथ वर्षा की ध्वनि सुनती और उसकी प्रतीक्षा करती हूँ। इसी कारण मैंने यह गीत लिखा। जहाँ भी तुम जाओ, वर्षा हो तो मुझे याद करना, वर्षा हो तो मुझे याद करना। मेरे प्रिय...

मैं कई महीनों से खाँस रही हूँ। यह सुनकर कान पक जाते होंगे। (नहीं, आपकी आवाज़ बहुत अच्छी है, मास्टर।) (आपकी आवाज़ वास्तव में अच्छी है।) ओह मेरे भगवान, मुझे बहुत खांसी आ रही है! (आपकी आवाज बहुत अच्छी है। आप नीचे और ऊपर दोनों के सुर लगा सकती हैं।)

तुम जानते हो, मैं कितनी अकेली होगी, वर्षा मुझे याद दिलाती है अपने दूर देश की।

“न्गुओई” बड़े अक्षर से लिखा गया है। “न्गुओई” ईश्वर को दर्शाता है, सिवाय जीव को। आह। वह लगभग ऐसा ही है। अभी और भी बहुत कुछ है। (हाँ, और आज गुरुवर थके भी हैं।) (ठीक है, अब हम चलते हैं।) (ठीक है।) समाचार पत्र प्रिंट करेंगे? (गुरुवर, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!) ठीक है। धन्यवाद की कोई बात नहीं। (धन्यवाद, गुरुवर।) मेरे पास समय ही बहुत कम है। वरना, अगर आपको संगीत पसंद हो, तो मैं सारा दिन यहाँ बैठकर आपके लिए गा सकती हूँ और कविता-पाठ भी कर सकती हूँ। मुझे यह करना बहुत पसंद है। क्या आपको कविता-पाठ सुनना पसंद है? (हाँ, मुझे पसंद है।) आपको कविता पसंद है, है ना? (हाँ, अवश्य पसंद है।) आह, तो पसंद है आपको यह।

Photo Caption: "अपनी आत्मा को सबसे महान पर टिकाना और आराम देना, पृथ्वी पर शांति पाना आसान नहीं है!"

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