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इस एपिसोड में, मास्टर स्वतंत्र इच्छा और सुप्रीम मास्टर चिंग हाई अंतरराष्ट्रीय संघ के परोपकारी प्रयासों पर चर्चा करते हैं तथा श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर देती हैं।Bonnie: मास्टर, आप बहुत बातें करते हैं, और आपने आज ज़रूर इस बारे में बात की है, जिसे आप प्रोविडेंस कहते हैं। (हाँ।) हममें से कुछ लोग इसके लिए, मुझे लगता है “किस्मत” शब्द का इस्तेमाल कर सकते हैं, हालाँकि प्रोविडेंस मुझे ज़्यादा आध्यात्मिक लगता है। (हाँ।) मुक्त इच्छा के बारे में क्या?Master: स्वतंत्र इच्छा। यह वह चुनाव है जो हम भौतिक जन्म से पहले और भौतिक जीवन के दौरान करते हैं। लेकिन मृत्यु के बाद, हम तब तक चुनाव नहीं कर सकते, जब तक इस जीवन में अर्जित पुण्य हमारे पास न हो। उदाहरण के लिए, इस संसार में जन्म लेने से पहले, हमरे पास विकल्प होता है, कि हम ऐसे या ऐसे व्यक्ति बनेंगे। (हाँ।) लेकिन फिर, जब यहाँ आ जाते हैं हम उसको परिस्थितियों और समाज के मनाने के अनुसार हम उसे बदल देते हैं। (ठीक है।) और तब हम स्वतंत्र इच्छा भी खो देते हैं। हमें लगता है कि हम स्वतंत्र हैं, लेकिन हम नहीं होते।तो सच्ची स्वतंत्र इच्छा, सच्चा चुनाव, यहाँ बात हो रही है चुनाव के अधिकार की, सच्चा चुनाव तो हमारे जन्म लेने से पहले ही हो जाता है। फिर, जैसा जेरेड ने कहा, हम माया के परदे के पीछे आ जाते हैं, (सही।) और हमें याद नहीं रहता वह…। आप उसे सहमति कहेंगी या अनुबंध? सही। सही। (हाँ।) अपनी ही अंतरात्मा से किया गया वचन।फिर भी, यहाँ एक अनुभव साझा करना चाहूँगी, जेरेड और मेरे हमारे जीवन में ऐसा हुआ है, उदाहरण के लिए, वह बिना कारण जाने उत्तरी कैलिफ़ोर्निया से सैंटा क्रूज़ चला गया। (हाँ।) उसके सपने उसे निर्देश दे रहे थे, “सैंटा क्रूज़ लौट जाओ।” वह बार-बार पूछता था, “क्यों?” उसे कभी उत्तर नहीं दिया जाता था, लेकिन उसमें उस संकेत का अनुसरण करने की आस्था थी। क्या आप इसी तरह की बात कर रही हैं? (हाँ।)कभी-कभी पिछले संबंधों और प्रबल पूर्व कर्मों की शक्ति हमें स्थान-परिवर्तन कराती है, जो हमारी इच्छा से परे होती है। कभी-कभी ईश्वरीय विधान हमें किसी जगह पर कोई उद्देश्य पूरा करने के लिए स्थान-परिवर्तन कराता है। मेरा मानना है कि सैंटा क्रूज़ उनके लिए बेहतर है, जहाँ अब वह बहुत अच्छा काम कर रहा है। (उसे कल्पना भी नहीं थी कि वह रेडियो वार्ता-कार्यक्रम का प्रस्तोता बनेगा।) बिल्कुल, उसे नहीं थी। (क्या वहाँ कोई संकेत मिल रहा है?) हाँ। तो अब उसे कारण पता है, है न? या नहीं? ठीक है। (हाँ, मुझे पता है।)वैसे, मैं आपको बताना भूल गई, कि माँग के अनुसार हमने लोगों को रूस भी भेजा था। मैं भूल गई थी। (बहुत बढ़िया।) अब यह हर जगह फैल चुका है। लोग बहुत आध्यात्मिक हैं और अपने महत्त्तर स्व के ज्ञान के लिए बहुत प्यासे हैं। (हाँ।)Bonnie: मास्टर, हमने बहुत-से लोगों से बात की है। हमारी गैर-लाभकारी संस्था का नाम ग्लोबल फ़ैमिली है, और वह रूस में बहुत काम करती है। (हाँ।) वहाँ से लौटकर वे हर बार यही कहते हैं कि वहाँ के लोग बहुत भूखे हैं अपने (सही।) जीवन में आध्यात्मिकता पाने के लिए।Master: (हाँ। हाँ, अच्छा। आप बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।) हाँ।(मुझे पता है कि आप वर्ल्ड पीस अवार्ड के प्राप्तकर्ता है। यह एक पुरस्कार था जो हाल ही में 25 अक्टूबर, 1993 को होनोलूलू में आपको दिया गया था, इस बार मैं यह सुधारती हूँ। यह आपको मेयर फ़ासी द्वारा दिया गया था, कम-से-कम इसे प्रस्तुत उन्होंने ही किया था, होनोलूलू के मेयर द्वारा। शायद कृपया हमें कुछ बताएँ कि आपकी संस्था ने दुनिया भर के लोगों की सहायता के लिए वस्तुतः क्या-क्या किया है।)हमने अनेक देशों की सहायता की जब उन्हें आवश्यकता होती है, साथ ही परोपकारी कार्य करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं की भी। (हाँ।) और मैं बस उन सभी के नाम नहीं दे सकती; वे बहुत अधिक हैं। जैसा कि अब तो आप जानते हो, किसी ने बताया था आपको, हमने पिनातुबो ज्वालामुखी [विस्फोट के पीड़ितों] और हाल में यहाँ बाढ़ तथा आग से प्रभावित लोगों। (हाँ।) और अधिकांश धन मेरी कमाई से तथा उन तथाकथित भिक्षुओं और भिक्षुणियों की कमाई से आया, जो मेरे निकट के अनुयायीओं हैं। मेरा अर्थ है, जिन्होंने महत्तर स्व के उद्देश्य को अपना जीवन समर्पित किया है। (हाँ। हाँ।) तो, सदस्यों भी कभी-कभी दान देते हैं; आपदाओं के समय वे सीधे पीड़ितों को दान देते हैं।(खैर, मेरे विचार से वह सहायता अद्भुत थी, जाहिर है, क्योंकि बहुत-से अमेरिकियों ने अपनी आँखों से नहीं देखा कि, पिनातुबो पर्वत के विस्फोट से वहाँ क्या हुआ था। संयोग से मैंने टेलीविज़न पर उस पर एक लंबा विशेष कार्यक्रम देखा था।) खैर, हमारे शिष्यों पर्वत से केवल पाँच किलोमीटर दूर थे।Jared: वह सचमुच अविश्वसनीय था। (हाँ।) उसकी तुलना में माउंट सेंट हेलेंस जैसा विस्फोट भी काफी छोटा लगता है। और, निश्चित रूप से, मैं भी सोचता हूँ, इनमें से कई देशों काम कर रहें हैं इमारतों की ऐसी परिस्थितियां के साथ और घरों की गुणवत्ता भी वैसी नहीं है, और लोग अचानक बेघर हो जाते हैं। इसलिए, आपके उपहार और आपके साथ जुड़े उन लोगों को (धन्यवाद।) आशीर्वाद दें, जिन्होंने यहाँ इन पीड़ितों (धन्यवाद।) के लिए अपना योगदान दिया है... (हाँ।)Master: इस वर्ष हमने अमेरिकियों के लिए यूएस$10,000,000 अलग रखे हैं। (यह अविश्वसनीय है।) बात धन की नहीं है। यह प्रेम है हमारा, क्योंकि संसार के दुखों की तुलना में यह राशि बहुत नगण्य है। लेकिन इतना ही, जो हम कर सकते हैं। समझ रहे हैं? हमसे जो बन सकता है, हम करते हैं (सही।) उस समय, है न? (सही। सही।)मास्टर, अब ‘सीइंग बियॉन्ड’ में हम अपना अंतिम विराम लेंगे, और फिर लौटेंगे।Jared: आज दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया से फ़ोन पर जुड़ी हमारी अतिथि सुप्रीम मास्टर चिंग हाई का हम स्वागत करते हैं। (नमस्कार।) नमस्कार। पैसिफ़िक ग्रोव से एक श्रोता फ़ोन करके दीक्षा के बारे में कुछ ज्यादा जानना चाहते है कि दीक्षा का अर्थ क्या है, मास्टर के रूप में आपके लिए इसका क्या अर्थ है? क्या इसमें कोई अनुबंध होता है? क्या इसका अर्थ है कि मास्टर किसी के निजी गुरु बन जाते हैं?Master: वास्तव में, उस अर्थ में हमारा कोई गुरु नहीं होता, लेकिन केवल जब तक तथाकथित शिष्य स्वयं की अपनी मास्टरशीप को पहचान नहीं लेता, फिर केवल तब तक उसका मार्गदर्शन करने के लिए एक तथाकथित मास्टर आवश्यक होता है। हाँ। लेकिन हमारा कोई अनुबंध या ऐसा कुछ नहीं होता। निस्संदेह, आपका स्वयं से यह अनुबंध होता है कि आप अंत तक इस मार्ग पर डटे रहेंगे। यह आपके अपने हित में है। और दीक्षा का अर्थ केवल वह क्षण है, जब पहली बार स्वयं की परम चेतना को पहचानना हैं। बस इतना ही।Jared: तो मेरी समझ से आप कह रही हैं कि जब तक व्यक्ति अपने भीतर के मास्टर को नहीं खोज लेता, (हाँ।) तब तक कुछ समय के लिए उसे बाहर एक मास्टर की आवश्यकता होती है।Master: हाँ, बस यही है। लेकिन यह भी, मास्टर केवल भौतिक स्तर पर नहीं, भीतर के मार्गदर्शक भी हैं। (हाँ।) क्योंकि, वरना, मास्टर हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे और दुनिया भर में, शिष्य की सहायता (हाँ।) नहीं कर सकेगा, दिन-रात किसी भी समय सभी लोगों की सहायता करने के लिए मास्टर का चेतना-स्तर बहुत ऊँचा होना चाहिए। वह व्यक्ति कहीं भी हो, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता। वही सच्चा मास्टर है।जनते हैं आप, मास्टर, हम अमेरिका में रहते हैं, जो एक ऐसा क्षेत्र है जो बहुत व्यस्त होता है। हम हमेशा भागदौड़ में लगे रहते हैं। मुझे लगता है, हमारी संस्कृति, अधिकतर कुछ होने के बजाय कुछ-न-कुछ करते रहने की है। फिर भी, आपके बारे में मैं जानकर, बस कुछ चीजे जो मैं करता हूँ, आप भी कर्मशील व्यक्ति हैं। आप बहुत सक्रिय हैं। आप संसार में बहुत ऊर्जा लगा रही हैं। कर्म करने और होने के अंतर पर कुछ बताएँ। आपने पहले कहा था कि हमें बस किसी गुफा में बैठकर केवल ध्यान नहीं करना है, बल्कि संसार में रहते और चलते हुए ध्यानमय जीवन जीना चाहिए। (सही।) क्या आप इसे थोड़ा और विस्तार से समझा सकती हैं? अच्छा, समझी। दीक्षा हो जाने के बाद, फिर आप संसार से भागे बिना, जीवन जीते हुए ध्यान करना सीखते हैं, इस महान ब्रह्मांडीय शक्ति को अपने दैनिक कार्यों में समाहित करते हैं और ध्यान के समय इसे थोड़ा अधिक सचेत रूप से संचित करके सांसारिक जीवन में बाँटते हैं, ताकि संसार का कल्याण हो। वरना ध्यान करके केवल स्वयं को ही लाभ पहुँचाने का कोई अर्थ नहीं है। वास्तव में, जब हम स्वयं को जान लेते हैं, तो पूरे संसार को आशीष दे सकते हैं। तो यही मुख्य बात है। और… (मास्टर। क्षमा कीजिए, आप बोलिए।) हाँ। क्षमा कीजिए, क्षमा कीजिए। (कृपया।)और हमारी दीक्षा और आत्मज्ञान के बाद, जो भी हम करते हैं, केवल बाहरी शारीरिक श्रम से कहीं उसमें गहरा अर्थ होता है, हम अपने काम करने में आनंद होगा, बस कोइ नीरस कर्तव्य नहीं, पहले जैसा उबाऊ कर्तव्य नहीं, और कम परिश्रम में अधिकाधिक योगदान देने में सक्षम होते हैं। मैं एक बहुत छोटी जन हूँ, और न उतना अधिक खाती हूँ, और न उतना अधिक सोती हूँ, पर आप कहते हैं कि मैं बहुत सक्रिय हूँ। यह इसी महान ऊर्जा के कारण है। यदि मैं कुछ न करूँ, तो मैं यह ऊर्जा से फट जाऊंगी। (अरे, मैं इस बात को अच्छी तरह समझती हूँ।) हाँ, प्रिय, आप समझ सकती हो। यह आपके भीतर है। (धन्यवाद।) संभवतः आप अभी से ऐसी हो। यदि आप अपने वर्तमान कार्य और जीवन से संतुष्ट और प्रसन्न हो तथा सबके प्रति प्रेमल अनुभव करती हो, तो सब पहले से ही ठीक है। यदि नहीं, तो आपको खोज करनी होगी। ठीक है?(मास्टर, मुज़े लगता है एक प्रश्न शायद आया है, यह निस्संदेह मेरे मन में है, और शायद हमारे कुछ श्रोताओं के मन में भी, वह है: क्या आपका कोई शिक्षक था?) हाँ, मेरे शिक्षक थे। मेरे कई शिक्षकों थें, बचपन से ही। (कोई एक विशेष व्यक्ति नहीं, बल्कि कई लोग जिन्होंने आपके जीवन को प्रभावित किया और आपको याद दिलाने में सहायता की आप कौन है?) ओअह, खैर, वह आप है जो आपको सहायता करता है अपने आप को याद कराने में। देखिए, दीक्षा वह समय है जब आपकी चेतना स्वयं को पहचानने के लिए तैयार होती है। (हाँ।) और मास्टर बस एक बटन दबा देता है। (तो क्या आपके लिए भी किसी ने वह बटन दबाने वाला था?) शायद, हाँ। खैर, यह कोई भौतिक प्रक्रिया नहीं है, हालाँकि इसका प्रभाव भौतिक शरीर पर भी पड़ता है, लेकिन खैर, मैं नहीं जानती, क्या कहूँ, यह एक प्रेम-कथा जैसा है, और बस आप इसे शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते।खैर, प्रेम-कथा की बात चली है, चले, शायद, अब हमारे पास कुछ ही मिनट बचे हैं। (ठीक है।) आइए, प्रेम के बारे में कुछ बात करें, क्योंकि जरूर हमारी संस्कृति में, और आप जहाँ से आती हैं संस्कृति की ओर से मैं कुछ नहीं कहूँगा, पर यहाँ पश्चिमी संस्कृति में जरूर, मुझे नहीं पता कि हम वास्तव में प्रेम का अर्थ समझते भी हैं या नहीं। हम बहुत-सी फ़िल्में देखते हैं, और बहुत रोमानी हो जाते हैं, और लेकिन प्रेम से हमारा आशय क्या है? आप प्रेम का अर्थ क्या करते है? वह ईश्वर के प्रेम का एक अंश है, जो एक व्यक्ति को दूसरे से बाँध देता है। और उस व्यक्ति का आस-पास होने के बिना आप जी नहीं सकते। तभी आप प्रेम में होते हैं। यह एक प्रकार की पीड़ा है, लेकिन सुंदर पीड़ा। (मुझे याद है।) और अब, यदि आप ईश्वर को जानते हैं, या ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो सचमुच ईश्वर से एकाकार है अथवा ईश्वर के संपर्क में है, तो आप भी उसके जैसे है। आपको लगता है कि उस व्यक्ति की उपस्थिति कभी पर्याप्त नहीं लगती। इसीलिए अनेक शिष्यों मास्टर को देखना चाहते हैं; नहीं कि मास्टर उन पर यह इच्छा थोपता है। जब तक वे स्वयं को पूरी तरह नहीं जान लेते। जब वे मास्टर को देखते हैं, तो वे अपने परम स्व को देखते हैं; वे ईश्वर को देखते हैं। और वह प्रेम और भी बड़ा होता है, स्त्री-पुरुष के प्रेम से और भी अधिक गहरा और अधिक अकथनीय होता है। वह अत्यंत गहरा, और अघाध होता है तथा आपको एक अद्भुत और एक अलग व्यक्ति बना देता है।खैर, मैं अपने श्रोताओं से यह अवश्य कहना चाहूँगा कि निर्वासन में रह रहे हमारे कुछ तिब्बती बौद्ध लामाओं के साथ मेरा अनुभव यह रहा है कि ऐसा नहीं था, यह जरूरी नहीं था कि उन्हें सिर्फ कुछ शब्दों ही कहने पड़ते थे, बल्की, यह बस उनकी उपस्थिति में होना ही था। (सही, सही।) और मुझे लगता है कि जो लोग बस आपकी उपस्थिति में होते हैं वे कुछ वैसा ही अनुभव करते हैं। शायद उन्हें आपसे कोई प्रश्न पूछने की भी आवश्यकता न हो; पर बस आपके साथ होना। (सही, सही।)(मैं धन्यवाद देना चाहती हूँ, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई को, साथ ही सोफी को, जो यहाँ स्टूडियो में हमारे साथ रहे और इस सुंदर शुक्रवार की ऊर्जा बनाए रखने में हमारी सहायता की। आपके साथ रहकर प्रसन्नता हुई, अगले सोमवार तक के लिए, ईश्वर आप सबको आशीर्वाद दें।) (आडिओस और अलोहा।) अलोहा। धन्यवाद।Bonnie: नमस्कार। नमस्कार, मास्टर। (हाँ, नमस्कार।) नमस्कार। हम आपको यूँ ही वहाँ फ़ोन पर प्रतीक्षा करते हुए नहीं छोड़ना चाहते थे। हम आपसे विदा लेना चाहते थे। (हाँ। अच्छा।) और आपका बहुत धन्यवाद। यह बहुत सुंदर साक्षात्कार था। यह दो घंटे चला। ऐसा लग रहा था कि यह जैसे 30 मिनट का समय था। (ओह, दो घंटे?) हाँ। क्या आपको भी यह छोटा नहीं लगा?Master: ओह, मुझे विश्वास नहीं हो रहा। (हाँ जी।) मुझे आशा है कि हम श्रोताओं के लिए सारपूर्ण बातों को अच्छी तरह प्रस्तुत कर पाए। (मुझे ऐसा लगता है।)(मेरे विचार से यह अद्भुत था, और मेरे विचार में टैलिफ़ोन लाईन पर ऐसा करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन मुझे लगता है, कुल मिलाकर यह बहुत अच्छा रहा, और मैं कह सकती हूँ कि लोगों इसे सुना क्योंकि इतने अधिक लोगों के फ़ोन आये थें।) क्या यह सच है? आशा है कि अगली बार आप एक अच्छा साक्षात्कार करें, फिर से। (धन्यवाद, मेरे प्रिय।) धन्यवाद। (खैर, मैं आपकी यह एक बहुत सुंदर तस्वीर देख रहा हूँ। मुझे लगता है, मुझे प्रेम हो गया है।) ओह, सच में? हाँ। हम सब एक-दूसरे के प्रेम में होते हैं, कभी न कभी। (आमीन।) आमीन। (नमस्ते।) नमस्ते। (अच्छा।) अलोहा। (अलोहा।) धन्यवाद। धन्यवाद और आप को शुभकामनाएँ (हाँ।) जो कुछ भी आप करना चाहें, (ठीक है।) (धन्यवाद।) मानवता के फ़ायदे के लिए। (आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।) (धन्यवाद। हम यह आशीर्वाद ले लेंगे।) यदि आपको हमारी जरूर हो, अपने कार्यक्रम या किसी अन्य कार्य में सहाय के लिए, तो कृपया… को बताएँ। हम ऐसा करेंगे।) ठीक है।Jared: मास्टर, मैं कहना चाहता हूँ, मैं आपकी इस बात की सचमुच सराहना करता हूँ, क्योंकि कभी-कभी बॉनी और मैं जो करना भूल जाते हैं वह है वास्तवे में ईमानदारी से सहायता माँगना, क्योंकि हमारे सामने यह बहुत बड़ा काम है, (सच है।) और हम इसे अकेले नहीं कर सकते। (सही।) तो आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं नहीं जांता, आपकी इस पेशकश की मैं बहुत सराहना करता हूँ, और इस समय मुझे आप से ऊर्जा और आपका प्रेम हम तक अनुभव हो रहे हैं। धन्यवाद।Master: धन्यवाद। (अच्छा।) फिर आपका दिन शुभ हो। (आपका भी।) अलविदा। (अलविदा।)Photo Caption: “आने वाला पतझड़, आत्मा की सर्दी की याद दिलाता है... यहाँ की ज़िंदगी हमारे घर की तरह चमत्कारी सोने से ढकी नहीं है!”











